Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2015

नवद्वीप यात्रा-संस्मरण

पटना से सुबह छह बजे ‘प्रसाद’ के ‘कंकाल’ से यात्रा शुरू होती है। दोपहर को आसनसोल पहुंचता हूँ , भोजन-आराम-गप्पें-निद्रा और एक दिन खत्म । सोचता हूँ कि एक दिन की यात्रा तो खत्म हो गई और अपने गंतव्य के निकट पहुंच भी चुका हूँ आज लेकिन जीवन की इस यात्रा में कब पहुँच सकूँगा अपने गंतव्य पे।क्या कभी पहुंच भी पाऊंगा ?  सहसा बच्चन याद आते हैं- “यह प्रश्न शिथिल करता मन को, भरता उर में विह्वलता है
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है।“
अगले दिन आसेनसोल से श्री नवद्वीप धाम के लिए विदा होता हूँ । संग होते हैं मेरे अनुज रतन बाबू। ये असनसोल में ही रहते हैं सपरिवार। आसनसोल बस स्टैंड से जो बस श्रीधाम नवद्वीप के लिए जाती है, उसका नाम है 'श्रीचैतन्य'। मन में आनंद होता है कि अभी से ही संग-साथ हो चला है महाप्रभु श्रीचैतन्य का जिन्होंने भारतीय दर्शन में अचिन्त्यभेदाभेद का प्रतिपादन किया था । पूरे रास्ते हरीतिमा देखने  में गुजर जाती है। शाम को नवद्वीप पहुंचता हूँ । बस स्टैंड से सीधे भागीरथी गंगा किनारे पहुंचता हूँ। बड़ा ही मनोरम दृश्य होता है वहां शाम के धुंधलके में। यहां गंगा के एक किनारे पर श्रीधाम नवद्वीप और दूसरे क…