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Showing posts from September, 2018

त' से कहलहुँ जे...

प्रत्येक व्यक्तिक स्वतंत्रता ओकर व्यक्तिगत अधिकार होइत अछि। ओकरा ओ सबटा स्वतंत्रताक अधिकार भेटओक जे ओकर छैक ताहि केँ हम पक्षधर छी।" बादलेयर" मोन पड़ैत छथि जे कहैत छलाह - "हम आहाँ सँ सहमत होइ वा नहि मुदा अहाँक अधिकारक लेल लड़ैत अपन जान तक देल जा सकैत अछि।" हम व्यक्तिगत रूप सँ सहमतो छी उक्त पाँति सँ। कला-संस्कृतिक गप्प करय बला केँ निश्चित रूप सँ उदारमना होयबाक चाही। आपेक्षित छैक ई विशिष्ठता। मुदा दोसर कात व्यक्ति केँ इहो सोचय पड़ैत छैक जे ककर लेल लड़ल जाए, ककर पक्ष मे ठाढ़ होइ, ककर समर्थन करी ? जँ ओ  अमुक व्यक्ति 'डिजर्व' करत हमर समर्थन वा पक्ष मे ठाढ़ होयब वा हमर ओकरा लेल लड़ब तहने ने !

व्यक्तिक व्यक्तिगत स्वतंत्रताक विस्तृत रूप ओकर घर, गाम सँ ल' क' ओकर देश तकक स्वतंत्रता थिकैक। हम कोनो भी तरहें एहि मे दखल पसिन्न नै करैत छी। मुदा व्यक्तिक स्वतंत्रता सीमा ओतहि शेष होइत छैक जतय सँ दोसर व्यक्तिक स्वतंत्रताक सीमा शुरू होइत छैक। तैं हमरालोकनि समाजक गप्प करैत छी आ ताहू समाज मे एकटा आवश्यक 'पर्सनल स्पेसक'। मुदा ई 'पर्सनल स्पेसक' सीमा सेहो ओतहि धरि ज…

दूटा कविता

1. ओहिसमयकबीचो-बीच
जखनभोरकमुँहपरसँ उठबैतअछिघोघसुरुजआ देखनगरहोइतअछिअन्तिमसाँसलैतएकटाराति तखनअहाँकघुरिअयबाकबाटतकैत प्रायःनिसभेरहोइतअछिसमय आएहिमातलसमयकबीच नैअहाँमातैतछीहमरामे,  आनेहमअहाँ