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Showing posts from April, 2020

यह प्यासों का प्रेम नगर है... - गुंजन श्री

गजलमे एकटा रिवाज़ छलैक जाहिमे जँ कोनो लेखककेँ कोनो आन लेखकक मतला पसिन्न आबि जाइत छलनि त' ओ ओहि पूरा मतला वा ओकर एकटा पाँतिकेँ ल' क' अपन एकटा नव गजल लिखैत छलाह। जाहि नव रचनाक विषय-वस्तु आ प्रकृति लगभग भिन्न रहैत छल मूल पाँतिक लेखककसँ । एकरा उत्कृष्ट उदाहरण हैदराबादक प्रसिद्ध शायर मखदूम आ मशहूर पाकिस्तानी शायर फ़ैज़क गजल "आपकी याद आती रही रात भर" अछि । मखदूम ई गीत फ़िल्म गमन लेल लिखने रहथि । पछाति हुनका निधनपर हुनका स्मृतिमे फ़ैज़ सेहो एहिए मतलाक एक पाँतिसँ  एकटा गजल लिखलनि । हेबनिमे त' श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी सेहो एहि मतलाक पाँतिसँ एकटा गजल लिखलनि अछि। कहबाक तात्पर्य ई जे ई एकटा स्वस्थ आ सुदृढ़ सन परम्परा छल । मुदा एमहर आबि क' ई स्वस्थ परम्परा लेखक सभक व्यक्तिगत 'ईगो'क कारण मकमका गेल अछि । मुदा नै , हियाओ नै हारू ; निभरोस नै होउ । मैथिली साहित्य जियौने अछि एहि परम्पराकेँ । मुदा एकर पाछूक जे मानसिकता अछि से चिन्तनीय अछि । 
कोनो कविताकेँ पढ़ि ओकर प्रतिउत्तर वा प्रभावमे आबि क' कविता लिखब वा लिखा जायब मनोवैज्ञानिक स्तरपर स्वाभाविक बात थिक, तखन, जखन कि ई स…

ग्लोबल गामसँ अबैत हकार - कृष्णमोहन झा 'मोहन' - गुंजन श्री

बर्ष 2017क जुलाई-अगस्तक गप थिक । मैसेंजर पर कृष्णमोहन जीक मैसेज आयल । लिखल छल- "अहाँक पोथी हमरा घरमे अहाँक प्रतीक्षा क' रहल अछि। अपन पता पठाबी।" ई पहिल गप छल हिनकासँ । तकर बाद बस पोथी प्राप्त भेल तकर सूचना पठेने रहियनि । लगले हैदराबाद शिफ्ट भ' गेल रही तैं पूरा पोथी नै पढ़ल भेल छल । ई मुदा लगैत रहैत छल जे व्यक्ति एतेक सहजतासँ बिनु बेसी गपशपक एतेक आत्मीय संबंध बना सकैत छथि ओ हो ने हो कविता ठीके लिखैत हेताह ।
हम मानैत छी जे जँ व्यक्ति अपन चरित्र आ सामाजिक संबंध ठीक नै रखैत हो त' ओ कतबो नीक लिखि लिये लेखक नै भ' सकैत अछि । कहि भने लिये कियो अपनाकेँ 'लेखक'। कतेको एहन उदाहरण देखल अछि जे घरमे माय/बहिन/पत्नी/बेटी आदि सभक कोनो मानि नै मुदा 'स्त्री-विमर्श' आ उत्कर्षक घनघोर सेनानी (?) । ई स्त्री आ पुरुष दुनू प्रकारक सेनानी(?) लेल देखबामे आयल अछि । खैर, से कहैत रही जे ओहि समय नै पढ़ि सकल रही 'ग्लोबल गामसँ अबैत हकार' । आइ पढ़लहुँ अछि । नीक संग्रह लागल ।
पूरा संग्रहक मूल स्वर लागल कविक गामसँ शेष होइत सरोकारक दुःख । कहल जा सकैछ जे संवेदनाक स्तरपर कृष्…

हम कोसिकन्हाक एकटा कवि - अजित आजाद

मैथिलीमे बहुत कम कवि छथि जिनका मादे कहि सकैत छी जे ओ 'मैथिलीक कवि' छथि । एखन मैथिलीमे चुट्टासँ शब्द पकड़ि कवितामे सन्हिया क' एकटा अनावश्यक प्रभाव उत्पन्न करबाक चलनिसारि उफानपर अछि ।दिनानुदिन चमत्कृत करबाक प्रयास करय बला कविक सभक लिस्ट बेस नमहर भेल जा रहल अछि । शब्दजाल गढ़बाक हिस्सक बढ़ल अछि । पुरखा सब जाहि वस्तुकेँ दुरूहसँ सरल बनओने रहथि तकरा पुनः दुरूह बनेबाक बाट ध' रहलाह अछि कवि लोकनि । कोनो शब्दमे बिनु भिजने ओकरा प्रयोग क' लेबाक साहस बढ़ि रहलैक अछि । एहना सन परिस्थितिमे श्री आजादक कविता एकटा भरोस दैत अछि । 'चेतना'क स्तरपर श्री आज़ाद बहुत मारुक कवि छथि । छोट-छोट बातकेँ अपन चेतना आ  पाठकक चिंतनक उच्च स्तरपर ठाढ़ करब हिनकर विशेष गुण छनि । लगभग 20 टा पोथी प्रकाशित छनि आ  'हम कोसिकन्हाक एकटा कवि' कविता-संग्रह प्रेस गेलनि अछि । ई पन्द्रह टा कविता टटका लिखल छनि । इच्छा भेला उत्तर पढ़ि क' 9304349384 पर कविकेँ नीक-बेजायक जनतब देल जा सकैत छनि ।


1. हम कोसिकन्हाक एकटा कवि

जाहि कालखण्डमे
भरनापर विचार
आ बन्हकी लागल कलम अछि
ओही कालखण्डमे
देशद्रोहीक तगमा लेने
हम लि…

अन्हारोमे ताकी सदा बाट भोरक - गुंजन श्री

मैथिली साहित्यमे उपन्यासक संख्या बड्ड थोड़ रहल अछि । डॉ. अमरेश पाठक, श्री अशोक, डॉ. रामानंद झा रमण आ डॉ. बिभूति आनंदक हिसाबे लगभग 250 उपन्यास अछि एखनधरि । हेबनिमे किछु आओरो उपन्यास सब लिखायल अछि । कहबाक माने ई जे मानल जा सकैछ जे गोटेक तीन सय उपन्यास होयत अपन मैथिली साहित्यमे । आ से कहल जे समुच्चा मैथिली उपन्यास वैवाहिक चिन्ता, कनियाँ-पुतरा, घोंघाउज-पुराण, मामी-भागिन, देओर-भउजी,आदि सबमे ओझरायल भेटत । आदरणीय सुधांशु शेखर चौधरी त' एहि सब प्लॉटकेँ 'राहु' कहने छथि जे सगर मैथिली उपन्यासकेँ गरसने रहल अछि । एहन सन परिस्थितिमे ललितक 'पृथ्वीपुत्र' आ धीरेन्द्रक 'भोरुकवा' बस यएह दूटा उपन्यास अछि जे मैथिली उपन्यासकेँ एकटा अलग 'जोन'मे ल' जाइत अछि । उक्त दुनू उपन्यासक लेखक समधानि क' आ सफलतापूर्वक उपन्यासकेँ मिथिलाक अपन खास भौगौलिक क्षेत्रमे रखने  छथि। भुरुकबाक नायक कमाय लेल कलकत्ता-दिल्ली-पंजाब आदि नहि जा क' दड़िभंगा जाइत अछि । हमरा लगैत अछि जे प्रायः पहिल (आ प्रायः एखनधरिक अंतिम सेहो) साहित्यिक घटना थिक जाहिमे लेखक मिथिलाक लोकक कमयबाक लेल अपन शहरक व्यव…