Skip to main content

Posts

देवशंकर नवीनक किछु कविता

देवशंकर नवीनक जन्म (2 अगस्त 1962) सहरसाक मोहनपुर (नौहट्टा) गाम मे भेल छलनि । श्री नवीन मैथिली आ हिन्दी मे समान रूप सँ कथा, कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत रहलाह अछि । मैथिली-हिन्दी मिला क' संकलन, संपादन आ मूल लेखनक दर्जनों पोथी प्रकाशित छनि । 'राजकमल रचनावली'क (हिन्दी) संपादन सेहो हिनके द्वारा भेल छल जे 'राजकमल प्रकाशन' सँ प्रकाशित अछि । "चानन काजर" (कविता संग्रह) "किसुन संकल्प लोक' , आधुनिक साहित्यक परिदृश्य (आलोचना) "अन्तिका प्रकाशन" सँ, "हाथी चलय बजार" (कथा) "चतुरंग प्रकाशन" सँ आ "मैथिली साहित्य : दशा, दिशा आ संदर्भ" (मैथिली) "नवारम्भ प्रकाशन" सँ प्रकाशित छनि। सम्प्रति श्री नवीन दिल्ली मे रहैत छथि आ देशक प्रतिष्ठित विश्विद्यालय जे.एन.यू. मे प्रोफेसर छथि । प्रोफेसर नवीन सँ संपर्क एहि लिंकक ( https://www.jnu.ac.in/content/deoshankar ) माध्यम सँ कयल जा सकैछ ।

1. बिज्जू स्त्रीवाद

इजलास पर जज बैसल छथि
कठघरा मे एक दिश राम
आ एक दिश जानकी ठाढ़ि छथि
ऋषिक कुटी मे सम्मन पहुँचल रहनि
जानकी केँ मोआबजा दियेबाक लेल
को…

भाषा आ भाषा-विचार - डा. कमल मोहन चुन्नू

भारतवर्ष अदौ सँ ज्ञानक भंडार रहल अछि। एतय ज्ञानक एतेक मान रहल अछि जे एतहुक पहिल पुस्तकक नाम वेद, अर्थात् ज्ञान राखल गेल। ई ज्ञाने भारतीयक चरम उपास्य रहल अछि। वैदिक वांग्मय तँ एकटा विशाल ज्ञानसागर अछि। एकर गम्भीरता आ विस्तार असीम अछि, अनन्त अछि। वेदान्त मे आनन्द आ विज्ञान केँ ब्रह्मस्वरूप मानल गेल अछि -विज्ञानमानन्द ब्रह्म1। तैत्तरीयोपनिषद मे तँ विज्ञाने केँ ज्येष्ठ ब्रह्म कहल गेल अछि - विज्ञानं देवाः सर्वे ब्रह्म ज्येष्ठमुपायते2। एहि विज्ञानक माधयम सँ वेदक ज्ञान होइत अछि । भर्तृहरि सेहो एकरा पराविद्या एवम् पवित्रम् ज्ञान कहने छथि- पवित्रं सर्वविद्यानामधिविद्यं प्रकाशते3। अपना ओतय भाषा-अध्ययनक क्रम मे सेहो एकरा विचारपूर्वक अध्ययन करबाक महदादेश अछि। एहि प्रकारक आग्रह-आदेशादि मे भाषा-संदर्भित एकटा वैचारिक अधययन आ एकटा वैज्ञानिक अध्ययनक खगताक निर्देश सेहो पार्श्ववर्ती रूप मे नुकायल रहैत अछि। एतय एहि प्रकारक अध्ययनक असंख्य घटना भारतीय वांग्मय मे अपन सम्पूर्ण गाम्भीर्य आ वैशिष्ट्यक संग आइयो उपास्थित अछि, सुरक्षित अछि। भारतवर्ष मे भाषाक वैचारिक-वैज्ञानिक चिन्तन अत्यन्त प्राचीनकाल सँ होइत आबि…

कृष्णमोहन झाक किछु कविता

मिथिलाक मधेपुरा जिलाक जीतपुर गाम मे 1968 ईस्वी मे जनमल कृष्णमोहन झा  दिल्ली विश्वविद्यालय सँ हिन्दी मे एम.ए आ जेएनयू सँ एम.फिल. आ पीएचडी छथि आ सम्प्रति असम विश्विद्यालय, सिलचर मे हिन्दीक प्रोफेसर छथि । हिन्दी मे एकटा कविताक पोथी 'समय को चीरकर' प्रकाशित-प्रसंशित छनि । 'कन्हैया स्मृति सम्मान' आ 'हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार' सँ सम्मानित कृष्णमोहन झा ई मानैत छथि जे हुनकर कोनो कविता कोनो विचारधाराक अनुगमन नै करैत अछि मुदा ओ संगे इहो मानैत छथि जे विचारधाराक भूमिका केँ खारिज करबाक ई तात्पर्य नै जे कविताक नाम पर मूल्यविहीन फोंक पद्याभ्यास केँ प्रस्तावित करी । कृष्णमोहन जीक अनुसार हुनक कविता मनुक्खक स्वाधीनता आ गरिमाक रक्षा लेल प्रयत्नशील अछि । ओ दिन-राति, चलैत-बुलैत, सुतैत-उठैत ओहि 'स्पेस' केँ तकबा आ रचबा लेल बेकल रहैत छथि जाहि ठाम जीवन असंख्य रूप मे क्रियाशील रहैत अछि । मैथिली मे हिनक एकटा कविता संग्रह 'एक टा हेरायल दुनिया' अन्तिका प्रकाशन सँ प्रकाशित छनि । प्रस्तुत पांचो कविता उक्त संग्रहे सँ लेल गेल अछि । इच्छा भेला उत्तर कृष्णमोहन जी सँ jha.krish@y…