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Showing posts from November, 2018

रास, रासक आ लीला समानार्थी नहि- डॉ. कमल मोहन चुन्नू

चैतन्यदेवबंगालकएकटासमर्थसांस्कृतिकनायकरूपमेप्रसिद्धभेलछथि।हिनकरजीवनीपढ़लासँआहिनकहिपरम्पराकपरवर्तीआचार्यलोकनिकसाहित्यदेखलासँएतबाअवश्यस्पष्टहोइछजेहिनकजीवनमेनाट्य-विधाकबेसमहत्वछल।नाटक-लीलादिककतेकोआयोजनकएनेरहथि।कानाइन